Atma-Bodha Lesson # 56 :
OCT 25, 2021
Description Community
About

आत्म-बोध के 56th श्लोक में भी भगवान् शंकराचार्यजी हमें ब्रह्म की महिमा उसका वास्तविक अर्थ बता रहे हैं। श्लोक का अंतिम पद समान है - की उसको ही ब्रह्म जानो। किसको? जो श्लोक में पूर्ण तत्व है। जो सचिदानन्द स्वरुप है। वो ही तीनों दिशाओं में अपनी माया से विविध रूपों में अभिव्यक्त हो रहा है। तीन दिशाएं मतलब - ऊपर, नीचे और पृथ्वी के ऊपर। जो स्वतः अनंत है, जिसके दृष्टी से कोई द्वैत नहीं होता है। वह ही ब्रह्म है - हे मन अपने समस्त विक्षेप त्यागो और मात्र उसमें अपना ध्यान लगाओ। ब्रह्म के अलावा पूरे ब्रह्माण्ड में और कुछ भी नहीं है।


इस पाठ के प्रश्न : 



  • १. ब्रह्म के विविध लक्षणों का क्या प्रयोजन है ? 

  • २. क्या सबके तत्त्व देखने के बाद व्यवहार संभव होता है ? 

  • ३. सच्चिदानन्द शब्द को संक्षेप में समझाएं ?


Send your answers to : vmol.courses-at-gmail-dot-com

Comments