मेरे पाँच मिनट
JAN 14, 2022
Description Community
About

जब हम ख़ुद के लिए "मेरा वक़्त" या "मेरे पाँच मिनट" निकालने लगते हैं तब हमें उनका महत्व समझमें आने लगता है। हमारे वे पल ख़ास होते हैं। कोई किताब पढ़ना, किसी से बात करना, चाय की चुस्कियाँ लेना या ख़ुद के साथ एकांत में समय बिताना। तो क्या आज आप उन पाँच मिनटों को मेरे साथ बाँटना चाहेंगे? 


Related listen: "वक़्त मिलता नहीं निकालना पड़ता है"


You can follow me at:


Facebook: MothersGurukul  


Twitter: alpana_deo 


Instagram: alpanabapat 


Blog: Mothers Gurukul 


Email: batonbatonmeinpodcast@gmail.com

Comments